संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। सोमवार को राज्यसभा से पारित होने के बाद शुक्रवार को लोकसभा ने भी इस विधेयक को स्वीकृति दे दी। इस कानून का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और भुगतान संबंधी विवादों के समाधान की प्रक्रिया को अधिक सरल एवं तेज बनाना है।
लोकसभा में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने विधेयक को सदन के समक्ष प्रस्तुत किया। नए प्रावधानों के तहत सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एमएसएमई से खरीदे गए सामान और सेवाओं के सभी बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) के माध्यम से करना अनिवार्य होगा।
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि मध्यस्थता के दौरान विवाद का समाधान नहीं हो पाता है तो मध्यस्थता समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर मामला पंचाट के लिए भेजना होगा। साथ ही, सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के भीतर पंचाट का फैसला सुनाना अनिवार्य रहेगा।
नए कानून के अनुसार यदि कोई मामला छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो पंचाट द्वारा निर्धारित राशि का कम से कम 50 प्रतिशत संबंधित आपूर्तिकर्ता को भुगतान करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे एमएसएमई इकाइयों को समय पर धन उपलब्ध होगा और उनकी नकदी संबंधी समस्याएं कम होंगी।
विधेयक पारित होने के बाद कार्यवाही के दौरान सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने और सदन की गरिमा का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पोस्टर और बैनर लेकर लगातार कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटकर रचनात्मक चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया और भरोसा दिलाया कि सभी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद के सत्र के दौरान नियमित रूप से सदन में उपस्थित रहते हैं और देर रात तक कार्यवाही में भाग लेते हैं।
लगातार हंगामे के कारण पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने महात्मा गांधी के “करो या मरो” के आह्वान को याद करते हुए कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन राष्ट्रीय एकता, साहस, सत्य और अहिंसा का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने के साथ देशवासियों में आत्मविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।
सदन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा उनके सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा।
इसके बाद प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नकाल सदस्यों को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है और संसद का उद्देश्य सार्थक चर्चा एवं विचार-विमर्श करना है। हालांकि लगातार हंगामे के चलते पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
