कैंसर की जल्द पहचान और मरीजों को सही इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने बचे हुए 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को इसे ‘नोटीफिएबल बीमारी’ (Notifiable Disease) घोषित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया।
अदालत को सूचित किया गया कि संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के बाद देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 पहले ही कैंसर को नोटीफिएबल बीमारी अधिसूचित कर चुके हैं।
जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर को देश भर में अधिसूचित बीमारी घोषित करने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया था।
- केंद्र का रुख: केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय (State Subject) है। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि 17 राज्य पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं।
- अदालत का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सिफारिशों पर विचार कर उचित फैसला लेने और अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने पूरे देश में कैंसर स्क्रीनिंग (जांच) को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर भी जवाब मांगा है।
