सोमवार को रिकॉर्ड उच्च स्तर छूने के बाद सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में हल्की नरमी देखने को मिली। सोना और चांदी दोनों ही ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद दबाव में आए, जिसकी मुख्य वजह निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करना रही। हालांकि, चांदी ने शुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी दिखाई और मजबूती के साथ कारोबार करती नजर आई।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ी अनिश्चितताओं और वैश्विक घटनाक्रमों के चलते पिछले कुछ दिनों में सोने-चांदी के दाम तेज़ी से बढ़े थे। लेकिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत गिरकर 1,41,577 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपये की तेजी के साथ 2,70,322 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखाई दी।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव घटकर 1,40,482 रुपये रह गया, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,40,499 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंची थी। इस स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए बिकवाली शुरू की, जिससे कीमतों में नरमी आई।
सोने की कीमतों में हालिया तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की घोषणा और ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सैन्य कार्रवाई की चेतावनी ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। इन घटनाओं के चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख किया, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के अनुसार, बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच पर बनी हुई है। पॉवेल ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक दबाव करार दिया है, जिसका उद्देश्य ब्याज दरों में कटौती करवाना बताया जा रहा है। निवेशक अब अमेरिका के महंगाई से जुड़े अहम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की मौद्रिक नीति को लेकर स्पष्ट संकेत मिल सकें। अनुमान है कि इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन साल के अंत तक दो बार कटौती संभव है।
इसके अलावा, अमेरिका की हालिया रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने की जानकारी मिली है, जिससे यह धारणा मजबूत हुई है कि फेडरल रिजर्व आगे चलकर नरम रुख अपना सकता है। ईरान में राजनीतिक अस्थिरता, रूस-यूक्रेन युद्ध और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के संकेतों ने भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता को बढ़ाया है। इन सभी कारणों ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है।
तकनीकी स्तर की बात करें तो विश्लेषकों के मुताबिक सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपये के बीच मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपये के स्तर पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है। वहीं, चांदी के लिए 2,60,810 से 2,54,170 रुपये का सपोर्ट और 2,71,810 से 2,74,470 रुपये का रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में चांदी की मांग मजबूत बनी रह सकती है। उद्योगों में बढ़ता उपयोग, हरित ऊर्जा परियोजनाओं की मांग और सीमित आपूर्ति आने वाले समय में चांदी की कीमतों को और ऊंचाई पर ले जा सकती है।
