भारत सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच पूर्वी नागालैंड से जुड़े दशकों पुराने मुद्दों को सुलझाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते को पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस समझौते के तहत “फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA)” बनाने का रास्ता साफ हुआ है। यह नया प्रशासनिक ढांचा पूर्वी नागालैंड के छह जिलों के विकास और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से विकास और प्रशासनिक उपेक्षा की शिकायतों को दूर करना है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए इस करार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर क्षेत्र के विजन की दिशा में बड़ा कदम बताया गया है। शाह ने कहा कि यह समझौता क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे विवादों को खत्म करने और स्थायी शांति स्थापित करने में मदद करेगा।
इस समझौते में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण पर खास जोर दिया गया है। प्रस्तावित अथॉरिटी को कई विषयों पर अधिकार दिए जाएंगे और विकास फंड के वितरण की नई व्यवस्था भी लागू की जाएगी ताकि क्षेत्र के लोगों तक विकास का लाभ समान रूप से पहुंचे।
पूर्वी नागालैंड के लोग लंबे समय से अलग राज्य या अधिक स्वायत्तता की मांग कर रहे थे। इस समझौते को उस मांग के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें राज्य की सीमा बदले बिना प्रशासनिक और विकास संबंधी अधिकारों को मजबूत किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस समझौते से क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसे पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रिया को मजबूत करने और स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
