बिहार को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार डेयरी क्षेत्र को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य की 7,953 पंचायतों में सुधा दूध बिक्री केंद्र खोलने की पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस पहल के तहत हर घर तक शुद्ध दूध पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न सिर्फ आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण दूध मिलेगा बल्कि दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। सरकार का मानना है कि डेयरी सेक्टर के विस्तार से गांव-गांव में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और ग्रामीण परिवारों की आय मजबूत होगी।
बिहार स्टेट मिल्क कोऑपरेटिव फेडरेशन (COMFED) राज्य में डेयरी विकास का प्रमुख संस्थान है, जिसकी स्थापना 1983 में की गई थी। यह संस्था ‘सुधा’ ब्रांड के जरिए दूध और दुग्ध उत्पादों का विपणन करती है और ग्रामीण किसानों को डेयरी के माध्यम से आय के अवसर प्रदान करती है।
राज्य सरकार का लक्ष्य दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमता को लगातार बढ़ाना है। बिहार में दूध उत्पादन को आने वाले वर्षों में बड़े स्तर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे डेयरी सेक्टर राज्य की अर्थव्यवस्था में और मजबूत भूमिका निभा सके।
सरकार का मानना है कि डेयरी सेक्टर को मजबूत करने से पशुपालकों की आय बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। श्वेत क्रांति के माध्यम से बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।
