भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.88 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 728.49 अरब डॉलर से अधिक हो गया। यह अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है और भारत की आर्थिक मजबूती का संकेत देता है।
रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक सोने के भंडार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान सोने के भंडार का मूल्य 4.14 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets – FCA) होती हैं। इस घटक में भी बढ़ोतरी देखी गई है। FCA में 561 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है, जिसके बाद यह बढ़कर 573.12 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
डॉलर के संदर्भ में व्यक्त FCA में उन अन्य मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है जिन्हें भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार में रखता है। इनमें यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल हैं। इन मुद्राओं के मूल्य में होने वाली वृद्धि या गिरावट का असर भी कुल विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों पर पड़ता है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की स्थिति भी मजबूत हुई है। केंद्रीय बैंक की IMF में स्थिति 158 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर हो गई है। वहीं स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (Special Drawing Rights – SDR) का मूल्य भी 26 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.86 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह देश की आर्थिक स्थिरता और मजबूती का स्पष्ट संकेत देता है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आयात भुगतान और वैश्विक आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है।
विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत स्तर देश की मुद्रा को स्थिर बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। पर्याप्त भंडार होने से केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है, जिससे रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
