प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ताजा लेख (ओप-एड) में भारतीय लोकतंत्र को अधिक जीवंत और सहभागी बनाने के लिए विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक कदम में अब किसी भी तरह की देरी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। एक वीडियो संदेश साझा करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करने के लिए आगामी 16 तारीख को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि साल 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण लागू होने के साथ ही संपन्न हों।
अपने लेख में अतीत के प्रयासों का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि दशकों से पिछली सरकारों द्वारा महिलाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनका हक दिलाने के लिए कई बार कोशिशें की गईं, समितियां बनाई गईं और विधेयकों के मसौदे भी तैयार हुए, लेकिन वे कभी तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने याद दिलाया कि इसी दिशा में सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति के साथ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित कर एक नई शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि महिलाएं देश की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान असीम है। उनके अनुसार, विधायी निकायों में यह आरक्षण महज एक नीतिगत बदलाव नहीं बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और इस अडिग विश्वास का प्रतीक है कि समाज की प्रगति सीधे तौर पर महिलाओं की उन्नति से जुड़ी है।
महिलाओं की बहुमुखी प्रतिभा की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश की बेटियां विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, कला और यहां तक कि सशस्त्र बलों जैसे हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में सबसे आगे रहकर नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब महिलाएं देश के प्रशासन और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल होंगी, तो वे अपने साथ वे गहरे अनुभव और अंतर्दृष्टि लेकर आएंगी जिससे सार्वजनिक विमर्श और अधिक समृद्ध होगा। प्रधानमंत्री का मानना है कि महिलाओं की यह भागीदारी अंततः देश के सुशासन और निर्णय लेने की क्षमता को और अधिक प्रभावी तथा समावेशी बनाएगी।
