उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के समीप स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को ढहाने का रास्ता साफ हो गया है। संभल सिविल कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर लगाए गए स्थगन आदेश (स्टे) को खारिज कर दिया है। अब तहसीलदार कोर्ट के अंतिम आदेश के साथ ही प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर सकेगा।
इस विवाद की जड़ें दिसंबर 2025 में दर्ज कराई गई एक शिकायत में हैं। शिकायतकर्ता सुभाष त्यागी ने जिलाधिकारी को साक्ष्य सौंपते हुए दावा किया था कि 1990 से पहले यह पूरी जमीन कब्रिस्तान थी, जिस पर बाद में अवैध निर्माण कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि संभल हिंसा के दौरान इन्हीं मकानों की छतों से पुलिस पर पथराव किया गया था।
प्रशासनिक जांच और 30 नवंबर 2025 को हुई राजस्व विभाग की पैमाइश में अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 18 कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए गए। कब्जाधारियों ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर संभल सिविल कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें पूर्व में स्टे मिल गया था। हालांकि, अब कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्टे हटा दिया है। प्रशासन के अनुसार, तहसील कोर्ट से आदेश मिलते ही 18 दुकानों और मकानों के अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
