प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कर्नाटक दौरे के दौरान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देते हुए मांड्या जिले के प्रसिद्ध श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का भव्य उद्घाटन किया। अपनी इस यात्रा के अनुभवों और झलकियों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की असली ताकत उसके आध्यात्मिक मूल्यों में समाहित है। उन्होंने इस नवनिर्मित मंदिर को देश की शाश्वत आध्यात्मिक चेतना और सेवा व ज्ञान की उस अटूट परंपरा के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि बताया, जो सदियों से भारतीय समाज का मार्गदर्शन कर रही है।
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने ज्वाला पीठ के पावन दर्शन किए और श्री कालभैरव मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से उन्होंने रेखांकित किया कि हमारे तीर्थ और मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे हमारी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने जगद्गुरु परमपूज्य डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें आध्यात्मिकता और निःस्वार्थ सेवा का महान पुंज बताया। उन्होंने कहा कि महास्वामीजी के कार्यों ने न केवल समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि उनके विचारों ने अनगिनत लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी जनता के साथ अपने अनुभव साझा किए और मंदिर के उद्घाटन को एक अत्यंत विशेष और भावुक क्षण करार दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पवित्र स्थल आने वाले समय में सेवा, ज्ञान और सनातन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जिससे राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक बल मिलेगा।
