लोकसभा में आज संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा फिर से शुरू हुई। इन तीनों विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है। इन विधेयकों पर आज दोपहर बाद मतदान होने की संभावना है।
बहस में भाग लेते हुए द्रमुक सांसद कनिमोझी ने इन विधेयकों का विरोध किया और 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को पिछली रात अधिसूचित किए जाने पर हैरानी जताई। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि देश आज उस दहलीज पर खड़ा है जहां महिला आरक्षण के पक्ष में लगभग सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति है। वाईएसआरसीपी सांसद पीवी मिथुन रेड्डी ने अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि वे हमेशा से महिला सशक्तिकरण के समर्थक रहे हैं।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये विधेयक इसी संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने विधानसभा चुनावों के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता पर सवाल उठाए और इसे अनुचित करार दिया। टीडीपी सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायालु ने विधेयकों का समर्थन करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के कल के स्पष्टीकरण का हवाला दिया।
सपा सांसद डिंपल यादव ने सुझाव दिया कि यदि केंद्र वास्तव में महिलाओं को न्याय देना चाहता है, तो उसे बालिकाओं की शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने मांग की कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना वर्तमान सीटों पर ही लागू किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसे राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का एक ऐतिहासिक अवसर बताया। फिलहाल सदन में चर्चा जारी है।
