गुजरात हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषियों की सजा बरकरार रखी। (फोटो साभार: Wikimedia Commons / CC BY 3.0)
गुजरात हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साल 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट केस में विशेष अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। इसलिए अब इस भीषण आतंकी हमले के जिम्मेदार अपराधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी। अदालत ने आतंकवादी संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ के 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा की पूरी तरह से पुष्टि कर दी है। इसके अलावा, कोर्ट ने 11 अन्य अपराधियों को दी गई उम्रकैद की सजा को भी सही माना है। जस्टिस ए.वाई. कोग्जे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने दोषियों द्वारा दायर की गई सभी अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस बर्बर कृत्य के लिए विशेष अदालत का फैसला पूरी तरह न्यायसंगत था।
अहमदाबाद ब्लास्ट केस में हाई कोर्ट का फैसला
विशेष अदालत द्वारा साल 2022 में सुनाए गए फैसले को चुनौती देने वाली सभी अर्जियों पर लंबी सुनवाई हुई। इसके बाद, गुजरात उच्च न्यायालय ने कानून के कड़े रुख को स्पष्ट किया:
- 38 आतंकियों की मौत की सजा बरकरार: देश के न्यायिक इतिहास में एक साथ इतने बड़े पैमाने पर दी गई फांसी की सजा को उच्च न्यायालय ने सही माना है।
- अपीलें खारिज: आतंकवादियों के वकीलों द्वारा सजा को कम करने या राहत देने के लिए दी गई तमाम दलीलों को खंडपीठ ने कानूनन अमान्य पाया।
- 11 दोषियों को उम्रकैद: साजिश में शामिल अन्य 11 मुजाहिदीन सदस्यों को जेल की सलाखों के पीछे अपनी बची हुई जिंदगी बितानी होगी।
यह फैसला क्यों मायने रखता है?
यह न्यायिक फैसला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया में लंबा समय लगा, लेकिन यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को मजबूती देता है। एक साथ 38 दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखना आतंकवाद के खिलाफ न्यायपालिका के कड़े संकल्प को दर्शाता है।
अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाकर मासूम नागरिकों की जान लेने वाली ताकतों के लिए यह एक कड़ा संदेश है। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला देश की निचली अदालतों और जांच एजेंसियों के मनोबल को बढ़ाएगा। इसके परिणामस्वरूप, जटिल से जटिल आतंकी मामलों की पुख्ता जांच अंततः तार्किक और ऐतिहासिक न्याय तक पहुंचती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस पूरे मामले की जड़ें आज से करीब 18 साल पहले के उस काले दिन से जुड़ी हैं। उस दिन की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था:
- 70 मिनट का आतंक: 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर एक के बाद एक 21 सिलसिलेवार बम धमाके किए गए थे।
- मासूमों का नरसंहार: इस खूनी साजिश में 56 बेकसूर लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- अस्पतालों पर हमला: इस हमले की क्रूरता इस बात से समझी जा सकती है कि आतंकियों ने घायलों का इलाज कर रहे कुछ अस्पतालों को भी अपनी बमबारी का निशाना बनाया था।
- 2022 का विशेष अदालत का फैसला: सालों चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहियों के बाद, 2022 में विशेष अदालत ने देश के सबसे बड़े आतंकी नेटवर्क में से एक, इंडियन मुजाहिदीन के इन गुर्गों को दोषी पाते हुए यह ऐतिहासिक सजा सुनाई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी सही ठहराया है।
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