एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि आर्जिनिन (Arginine) नामक अमीनो एसिड शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि आर्जिनिन की कमी होने पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती है, जिससे कैंसर और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
यह अध्ययन अमेरिका के रॉकफेलर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया है और इसके निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका सेल (Cell) में प्रकाशित हुए हैं।
शोध के अनुसार आर्जिनिन शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है और यह प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों से भी प्राप्त होता है। यह अमीनो एसिड शरीर में प्रोटीन बनाने और कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को संचालित करने में मदद करता है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि जब शरीर में आर्जिनिन की मात्रा कम हो जाती है, तो कोशिकाएं एमएचसी-1 (MHC-I) नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पातीं। यह प्रोटीन प्रतिरक्षा तंत्र को कैंसरग्रस्त या वायरस से संक्रमित कोशिकाओं की पहचान कराने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ऐसी कोशिकाओं को समय पर पहचान नहीं पाती।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि यदि शरीर को उचित मात्रा में आर्जिनिन दिया जाए, तो एमएचसी-1 प्रोटीन का निर्माण फिर से बेहतर हो सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार सामान्य रूप से बाजार में उपलब्ध कुछ आर्जिनिन सप्लीमेंट की मात्रा भी इस प्रक्रिया में सहायक हो सकती है।
चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया गया कि जिन चूहों को आर्जिनिन से भरपूर भोजन दिया गया, उनमें कोलन कैंसर (बड़ी आंत के कैंसर) के ट्यूमर कम विकसित हुए। वहीं, फ्लू और सार्स-कोव-2 (कोविड-19 वायरस) संक्रमण वाले चूहों में भी आर्जिनिन युक्त भोजन से संक्रमण के लक्षण कम गंभीर रहे। यहां तक कि संक्रमण के बाद आर्जिनिन देने पर भी स्वास्थ्य में सुधार देखा गया।
शोधकर्ताओं का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में आर्जिनिन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है। यही कारण हो सकता है कि बुजुर्गों में कैंसर और श्वसन संबंधी वायरल संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में आर्जिनिन सप्लीमेंट को कैंसर की इम्यूनोथेरेपी और वायरल संक्रमण के इलाज के साथ मिलाकर उपयोग करने की संभावनाओं पर क्लीनिकल परीक्षण किए जा सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के आर्जिनिन सप्लीमेंट लेना शुरू नहीं करना चाहिए। इसके लाभ और सुरक्षा की पुष्टि के लिए मानवों पर व्यापक क्लीनिकल परीक्षण अभी आवश्यक हैं।
स्रोत: रॉकफेलर यूनिवर्सिटी द्वारा जारी शोध सामग्री, जर्नल ‘सेल’ में प्रकाशित अध्ययन
