यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) में एक नया और दिलचस्प मोड़ आया है। नाटो (NATO) के सबसे मजबूत और संस्थापक सदस्यों में से एक, बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर (Bart De Wever) अपनी रक्षा मंत्री और व्यापार मंत्री के साथ भारत के उच्चस्तरीय दौरे पर आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि बेल्जियम के पास रूस की जब्त (Freeze) की गई करीब 210 बिलियन यूरो (लगभग 210 अरब यूरो) की संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा जमा है। इसके बावजूद, भारत आने से ठीक पहले बेल्जियम के रुख ने पूरे यूरोप और नाटो संगठन में हलचल पैदा कर दी है।
रूसी संपत्ति पर यूरोप में घमासान
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोपीय संघ (EU) ने रूस की भारी-भरकम संपत्ति को फ्रीज कर दिया था। इसमें से अधिकांश पैसा बेल्जियम स्थित वित्तीय संस्थानों में सुरक्षित है।
- नाटो देशों का दबाव: ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देश बेल्जियम पर लगातार दबाव बना रहे थे कि वह इस रूसी पैसे को निकालकर यूक्रेन को सौंप दे, ताकि रूस के खिलाफ सैन्य मदद जारी रखी जा सके।
- बेल्जियम का इनकार: बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने इस मांग को साफ खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर रूस का पैसा अवैध रूप से यूक्रेन को दिया गया, तो इसके गंभीर और घातक परिणाम पूरे यूरोप को भुगतने पड़ेंगे।
नाटो में क्यों पड़ी दरार?
बेल्जियम के इस कड़े रुख से नाटो के सदस्य देशों के बीच की अंदरूनी दरार उजागर हो गई है।
- युद्ध लंबा खींचने की राजनीति: फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे बड़े देश घरेलू राजनीति के कारण युद्ध का माहौल बनाए रखना चाहते हैं।
- छोटे देशों पर आर्थिक बोझ: हंगरी, पोलैंड और बेल्जियम जैसे देशों का मानना है कि उनकी छोटी अर्थव्यवस्थाएं अब यूक्रेन युद्ध का आर्थिक बोझ सहन नहीं कर सकतीं। वे नहीं चाहते कि उनके टैक्सपेयर्स का पैसा इस अंतहीन युद्ध में बर्बाद हो।
- शांति की अपील: बेल्जियम ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि रूस के साथ कूटनीतिक (Diplomatic) बातचीत शुरू की जाए, वरना यूरोप आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा।
भारत यात्रा का असली मकसद: PM मोदी ही क्यों?
रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी इस तनाव के बीच बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत दौरा बेहद रणनीतिक माना जा रहा है:
| कारण | विवरण |
| ईमानदार मध्यस्थ (Bridge Builder) | भारत के संबंध रूस और पश्चिमी देशों (यूरोप/अमेरिका) दोनों के साथ बेहतरीन और संतुलित हैं। |
| पुतिन तक अनौपचारिक संदेश | बेल्जियम, PM मोदी के माध्यम से राष्ट्रपति पुतिन तक यह संदेश पहुंचाना चाहता है कि वे युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। |
| आर्थिक और व्यापारिक हित | बेल्जियम भारत को चीन से अधिक भरोसेमंद साझेदार और एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में देखता है। |
| ऊर्जा सुरक्षा | भारत वर्तमान में रिफाइंड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख वैश्विक हब बन चुका है, जो यूरोप के लिए बेहद जरूरी है। |
बेल्जियम का मानना है कि इस वैश्विक संकट को सुलझाने और रूस-यूरोप के बीच शांति का पुल बनाने की क्षमता इस वक्त केवल भारत के पास ही है।
