भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (2026) के तहत जयपुर के सवाई मान महल में आयोजित 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सदस्य देशों ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) को सुदृढ़ बनाने और एमएसएमई (MSME) के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर सहमति जताई।
‘जयपुर सहमति’ और एमएसएमई को बड़ा फायदा
बैठक में व्यापार वित्त की कमी को दूर करने के लिए ‘जयपुर सहमति’ जारी की गई, जिससे वैश्विक व्यापार में मौजूद लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के ट्रेड फाइनेंस गैप को कम करने में मदद मिलेगी:
- क्रेडिट असेसमेंट गाइडिंग प्रिंसिपल्स: निर्यात से जुड़े एमएसएमई के लिए नए सिद्धांतों को मंजूरी दी गई, जिससे छोटे उद्योगों का मूल्यांकन गिरवी संपत्तियों (Collateral) के बजाय उनके कैश फ्लो के आधार पर संभव हो सकेगा।
- इनवॉइस डिस्काउंटिंग: ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग सिस्टम के अध्ययन पर भी सहमति बनी, जिससे छोटे कारोबारियों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
खाद्य सुरक्षा और डब्ल्यूटीओ सुधारों पर भारत का रुख
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय किसानों के हितों और आजीविका सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधारों पर जोर दिया। भारत ने विकासशील देशों के लिए विशेष प्रावधानों की रक्षा करने और विवाद समाधान की दो-स्तरीय बाध्यकारी व्यवस्था को बहाल करने की मांग उठाई।
डिजिटल व्यापार और भविष्य की रणनीति
- ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030: इसे अंतिम रूप देने में भारत के नेतृत्व की सराहना की गई। इसमें व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- सीमा-पार डिजिटल सेवाएं: सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल सेवाओं के लिए साझा सिद्धांतों को मंजूरी दी गई।
- GVC कार्ययोजना (2026-2030): आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और फार्मा व खाद्य सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई।
बैठक के अंत में अध्यक्ष का वक्तव्य और चार महत्वपूर्ण अनुबंधों के साथ निष्कर्ष दस्तावेज जारी किया गया। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भारत के शानदार आतिथ्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
