प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर वित्त वर्ष 2026 से 2033-34 तक कुल 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में खेल उपकरणों के निर्माण, अनुसंधान (R&D), नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देकर देश को वैश्विक स्पोर्ट्स गुड्स उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है।
वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित यह योजना ‘खेलो भारत नीति 2025’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप तैयार की गई है।
स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (SGMZ) का होगा विकास
योजना के तहत विशेष स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (SGMZ) विकसित किए जाएंगे। इन जोन में निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण सुविधाओं, डिजाइन व प्रोटोटाइपिंग केंद्रों और सहायक उद्योगों को एक ही जगह लाया जाएगा। इसके लिए BHAVYA योजना और NICDC के इंडस्ट्रियल पार्कों के बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी।
निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए 1,130 करोड़ रुपये
सरकार ने घरेलू और विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एंकर इन्वेस्टमेंट सपोर्ट और टर्नओवर लिंक्ड सपोर्ट के तहत 1,130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, निजी निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
MSME, रिसर्च और गुणवत्ता प्रमाणन पर जोर
- MSME और क्लस्टर विकास: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा मेरठ व जालंधर जैसे मौजूदा खेल क्लस्टरों को अपग्रेड करने और कॉमन फैसिलिटी विकसित करने में मदद दी जाएगी।
- अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन (105 करोड़ रुपये): भारतीय खेल सामानों की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से सर्टिफिकेशन प्राप्त करने हेतु 105 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- रिसर्च और स्टार्टअप्स: प्रमुख शिक्षण संस्थानों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए जाएंगे, जो मटेरियल साइंस और उन्नत विनिर्माण तकनीकों पर शोध करेंगे। साथ ही खेल क्षेत्र के स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
कौशल विकास और निर्यात को बढ़ावा
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के माध्यम से भारतीय खेल ब्रांडों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और ब्रांडिंग मजबूत की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस योजना से देश के एथलीटों को विश्वस्तरीय उपकरण आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ अभियानों को मजबूती मिलेगी तथा ‘विकसित भारत@2047’ का लक्ष्य आगे बढ़ेगा।
