केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के भविष्य के तकनीकी विकास को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी बयान दिया है। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संप्रभुता के साथ-साथ पूरी तरह स्वदेशी और देसी इकोसिस्टम ही भारत की आने वाली पीढ़ी का वास्तविक विकास तय करेंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि डीप-टेक क्षेत्र में भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि देश कितनी कुशलता से एक भरोसेमंद और एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाता है। इसी विज़न को साकार करने के लिए सरकार द्वारा “रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) फंड” स्कीम की शुरुआत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य शोध और विकास के कार्यों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को कई गुना तेज़ करना है।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान नेशनल RDI इनिशिएटिव के तहत कई बड़े कदम उठाए गए, जिनमें पांच हाई-इम्पैक्ट RDI परियोजनाओं के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर करना, स्कीम के तहत पहला इलेक्ट्रॉनिक फंड डिस्बर्समेंट जारी करना और “क्वांटम-सेफ इकोसिस्टम इन इंडिया” पर एक विशेष रिपोर्ट जारी करना शामिल रहा। इसके अलावा, अप्रैल 2026 तक RDI स्कीम के तहत सेकंड लेवल फंड मैनेजर के तौर पर TDB की स्टेटस रिपोर्ट पर एक विस्तृत संग्रह भी जारी किया गया। इस संग्रह में RDI फंड को चालू करने में बोर्ड द्वारा की गई प्रगति, फंडिंग ट्रेंड और अत्याधुनिक स्वदेशी टेक्नोलॉजी के वाणिज्यीकरण के प्रयासों को बखूबी दिखाया गया है।
पांच स्वदेशी और अत्याधुनिक परियोजनाओं के साथ ऐतिहासिक समझौते
इस पहल के तहत देश की पांच बेहतरीन और उभरती हुई कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण एग्रीमेंट साइन किए गए, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। इनमें सबसे पहले मैसर्स ई-टीआरएनएल (e-TRNL) एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी पेटेंटेड 3-डाइमेंशनल इलेक्ट्रोड आर्किटेक्चर (3DEA) टेक्नोलॉजी पर आधारित उन्नत लिथियम-आयन बैटरी सेल के विकास और निर्माण के लिए समझौता किया है, जो देश के घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाते हुए हैदराबाद की मैसर्स ध्रुव स्पेस प्राइवेट लिमिटेड ने “प्रोजेक्ट गरुड़” के लिए हाथ मिलाया है, जिसके तहत एक स्वदेशी और मॉड्यूलर 500 किलोग्राम-क्लास सैटेलाइट प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाएगा जो सामरिक और वाणिज्यिक एप्लीकेशन के लिए रेजिलिएंट कम्युनिकेशन नेटवर्क को सपोर्ट कर सकेगा।
चिकित्सा के क्षेत्र में बेंगलुरु की मैसर्स आइस्टेम रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड ने दुनियाभर में वर्तमान में लाइलाज मानी जाने वाली दो गंभीर बीमारियों—ज्योग्राफिक एट्रोफी और इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के इलाज के लिए फर्स्ट-इन-क्लास सेल थेरेपी के विकास का जिम्मा उठाया है। उत्तर प्रदेश की मैसर्स नोक्कार्च (Noccarc) रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने इंटेलिजेंट मोबाइल लाइफ सपोर्ट सिस्टम (iMLSS) के विकास के लिए समझौता किया है, जो खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डिजाइन किया गया एक पोर्टेबल ICU-ग्रेड इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर प्लेटफॉर्म है। इसके साथ ही, रक्षा और लॉजिस्टिक्स को मजबूती देने के लिए नोएडा की मैसर्स एंड्यूर एयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड ने “प्रोजेक्ट सबल-200” के तहत एक स्वदेशी बिना पायलट वाला हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म विकसित करने का समझौता किया है, जो 200 किलोग्राम से ज्यादा का पेलोड लेकर मुश्किल और ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान भर सकेगा।
डिजिटल फंड ट्रांसफर और क्वांटम सुरक्षा पर विशेष जोर
RDI फ्रेमवर्क के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड ने अपनी पहली किश्त के रूप में मैसर्स आइस्टेम रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड को 50 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ट्रांसफर करके एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश की तकनीकी प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पारंपरिक मॉडलों को बदलते हुए निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले नवाचार के लिए एक बेहतरीन संस्थागत और वित्तीय सहयोग सिस्टम बनाया है। उन्होंने स्पेस और डीप टेक्नोलॉजी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में किए गए बड़े सुधारों का विशेष जिक्र किया। क्वांटम टेक्नोलॉजी के बढ़ते महत्व पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने शुरू के आठ साल में 2,000 किलोमीटर क्वांटम-सिक्योर कम्युनिकेशन क्षमता हासिल करने का जो लक्ष्य रखा था, उसका लगभग आधा हिस्सा देश ने चार साल से भी कम समय में पूरा कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि उभरती क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताएं हमारे मौजूदा बैंकिंग और दूरसंचार के क्रिप्टोग्राफिक सिस्टम के लिए चुनौती बन सकती हैं, इसलिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम-सेफ इंफ्रास्ट्रक्चर हमारी दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अनिवार्य हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने इस फंड को एक संभावित बदलाव लाने वाली पहल बताया। उन्होंने कहा कि देश को उस “Q-Day” के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए जब मौजूदा एन्क्रिप्शन सिस्टम कमजोर हो सकते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने इसे निजी क्षेत्र के R&D को मजबूत करने वाला सरकार का सबसे बड़ा कदम बताया। वहीं, TDB के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने योजना की भारी सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि इस पहल को बेहद कम समय में 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के 124 प्रोजेक्ट प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने गर्व से साझा किया कि चुने गए प्रोजेक्ट्स में से कुछ कंपनियाँ जून 2026 में फ्रांस के नीस में होने वाले ग्लोबल शोकेस “भारत इनोवेट्स 2026” का हिस्सा बनेंगी। यह पूरा कार्यक्रम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप भारत के डीप-टेक और क्वांटम नवाचार को एक नई गति देने के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
