गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) और लघु उद्योग भारती (LUB) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘GeM संवाद 2026’ कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी और किफायती बनाने के उद्देश्य से किए गए कई बड़े सुधारों की घोषणा की गई।
2024 में हुए समझौते के बाद से दोनों संगठनों ने मिलकर देश भर में कई प्रत्यक्ष कार्यक्रमों के साथ-साथ 108 वर्चुअल सम्मेलनों का सफल आयोजन किया है, जिसके माध्यम से एमएसएमई को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रमुख सुधार और मुख्य बिंदु:
- घटाया गया ट्रांजैक्शन शुल्क: GeM ने ट्रांजैक्शन शुल्क को ऑर्डर मूल्य के 0.50% से घटाकर 0.30% कर दिया है। अब ₹10 लाख तक के ऑर्डर पर कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लगेगा (पहले यह सीमा ₹5 लाख थी)। वहीं, ₹10 करोड़ से अधिक के ऑर्डर के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा को भारी कटौती के साथ ₹3 लाख तय किया गया है। वर्तमान में GeM पर मिलने वाले लगभग 97% ऑर्डर पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हैं।
- सुरक्षा राशि और असेसमेंट शुल्क में राहत: जुलाई 2025 से ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के तहत लगने वाली ‘कॉशन मनी’ (सुरक्षा राशि) की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा, जनवरी 2024 से ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) पर लागू वेंडर असेसमेंट शुल्क में 66% से 92% तक की बड़ी कटौती की गई है।
- TReDS एक्सचेंजों से एकीकरण: केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप, GeM को देश के सभी पांचों ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) एक्सचेंजों से जोड़ दिया गया है, जिससे एमएसएमई की कार्यशील पूंजी और समय पर भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा।
- GeM SAHAY के जरिए बिना कोलेटरल ऋण: GeM SAHAY के माध्यम से प्लेटफॉर्म पर प्राप्त होने वाले परचेज ऑर्डर के आधार पर बिना किसी गारंटी (कोलेटरल) के आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे कारोबार के लिए जरूरी पूंजी जुटाना आसान हो गया है।
- मजबूत सहायता नेटवर्क: लघु उद्योग भारती अपने अखिल भारतीय कार्यालय नेटवर्क, साप्ताहिक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों द्वारा संचालित ‘फैसिलिटेशन काउंटर’ के जरिए देश के कोने-कोने तक एमएसएमई को सहायता प्रदान करेगा।
GeM के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार और अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजीत बी. चव्हाण ने कहा कि इन सुधारों से एमएसएमई की भागीदारी लागत कम हुई है और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ के विजन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
