भारत सरकार ने वर्ष 2021 से 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाकर अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को नई मजबूती दी है। गृह मंत्रालय ने बताया कि भगोड़े अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2018 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू किया गया। इसके साथ ही भारत ने खुफिया जानकारी, आधुनिक तकनीक और समन्वित व्यवस्था पर आधारित एक सशक्त तंत्र विकसित किया है, जिससे विदेशों में छिपे अपराधियों की पहचान और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया तेज हुई है।
मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 से पहले भारत के केवल 37 देशों के साथ ही प्रत्यर्पण संधियां थीं। उस समय आर्थिक अपराध कर विदेश भागने वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने या उनकी संपत्तियां जब्त करने के लिए कोई विशेष कानून भी मौजूद नहीं था।
गृह मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2004 से 2013 के बीच भारत औसतन केवल चार भगोड़े अपराधियों का ही प्रत्यर्पण करा सका था, जबकि 110 प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित पड़े थे। मंत्रालय का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों में भगोड़ों को वापस लाने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सरकार की तीन प्रमुख रणनीतियों—वैश्विक संपर्क, मजबूत समन्वय और प्रभावी कूटनीति—पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस अवधि में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं।
इसके अलावा सरकार ने भारतपोल (BHARATPOL) प्रणाली शुरू की है, जिसके माध्यम से 1,400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ा गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान का समय घटकर मात्र 3 से 10 दिन रह गया है। वहीं ऑपरेशन त्रिशूल के तहत उपग्रह तकनीक और डिजिटल गतिविधियों के विश्लेषण की सहायता से विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे अपराधियों का पता लगाकर उन्हें कानून के दायरे में लाने की कार्रवाई तेज की गई है।
