भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है, जो अब तक अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) जैसी महाशक्तियां भी नहीं कर सकी थीं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर नेक्स्ट-जनरेशन ठोस रॉकेट ईंधन ‘BAM-H24’ (बाम H24) विकसित कर लिया है। भारत ने इस अद्वितीय और अत्यधिक ऊर्जावान ईंधन का आधिकारिक पेटेंट भी हासिल कर लिया है, जिसके बाद ऐसा स्वदेशी फॉर्मूला रखने वाला भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है।
क्या है BAM-H24 और क्यों है खास?
‘BAM-H24’ मुख्य रूप से बोरोन (Boron), हाइड्रोजन (Hydrogen) और नाइट्रोजन (Nitrogen) के संयोजन से बना एक विशेष केमिकल कंपाउंड है। यह ईंधन भारतीय मिसाइलों और अंतरिक्ष रॉकेट्स की रफ्तार, क्षमता और मारक दूरी को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करेगा।
‘BAM-H24’ की मुख्य विशेषताएं:
- अत्यधिक सुरक्षित: आमतौर पर उच्च ऊर्जा वाले शक्तिशाली ईंधन बहुत संवेदनशील होते हैं और मामूली झटके या घर्षण (रगड़) से ब्लास्ट हो सकते हैं। लेकिन BAM-H24 की खासियत यह है कि यह झटकों या रगड़ से नहीं भड़कता, जिससे इसका निर्माण, भंडारण और परिवहन बेहद सुरक्षित हो जाता है।
- मौसम का असर नहीं: बारिश, नमी या अत्यधिक उमस वाले माहौल में अन्य ईंधन हवा से नमी सोखकर अपनी गुणवत्ता खो देते हैं। इसके विपरीत, BAM-H24 हवा से नमी बिल्कुल अवशोषित नहीं करता और इसे किसी भी मौसम में सालों-साल सुरक्षित रखा जा सकता है।
- आत्मनिर्भर भारत: इस खोज के बाद भारत को उन्नत मिसाइल और स्पेस प्रोग्राम के लिए विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह भारतीय रक्षा बलों और अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) दोनों के लिए एक बड़ा ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि 1950 के दशक से ही अमेरिका और रूस जैसे देश इस बोरोन-आधारित तकनीक पर काम कर रहे थे, लेकिन वे इसे स्थिर और व्यावहारिक बनाने में असफल रहे थे। भारत ने न केवल इसे संभव बनाया है बल्कि विश्व पटल पर अपनी वैज्ञानिक श्रेष्ठता भी साबित की है।
