भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 690 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। इस गिरावट का एक बड़ा कारण स्वर्ण भंडार के मूल्य में आई कमी को माना जा रहा है, जो अकेले 5 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 115 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर आ गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में भी इस अवधि के दौरान 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी देखी गई है, जिसके बाद अब यह 551 अरब अमेरिकी डॉलर पर स्थिर है। हालांकि, भंडार के कुछ अन्य घटकों में मामूली वृद्धि भी दर्ज की गई है। विशेष आहरण अधिकार (SDR) 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़कर 18.78 अरब अमेरिकी डॉलर हो गए हैं। इसी तरह, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की आरक्षित स्थिति भी 8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि के साथ 4.86 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। विदेशी मुद्रा भंडार में इस तरह के उतार-चढ़ाव वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की मजबूती के बीच रिजर्व बैंक की विनिमय दर प्रबंधन नीतियों को दर्शाते हैं।
