जकार्ता में द्विपक्षीय वार्ता से पहले गर्मजोशी से हाथ मिलाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो। दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। (फोटो साभार: पीएम मोदी एक्स/ट्विटर)
जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़े शब्दों में निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस खतरे से निपटने के लिए एक समन्वित वैश्विक प्रयास का आह्वान किया है। जारी किए गए एक व्यापक संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत नामित वैश्विक आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इस रणनीतिक बातचीत का सबसे तात्कालिक असर दोनों देशों के सुरक्षा और आर्थिक ढांचे पर देखने को मिलेगा। आतंकवाद को लेकर ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए भारत और इंडोनेशिया ने आतंकी वित्तपोषण (Terror Financing) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) और संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर आपसी सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। इसके तहत उभरती हुई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले ऑनलाइन कट्टरपंथ और आतंकी भर्ती पर लगाम लगाने के लिए सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान किया जाएगा। दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग पर एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) को जल्द ही अंतिम रूप देने का स्वागत किया है।
सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया जा रहा है। साल 2026 में दोनों देश अपने पहले ‘संयुक्त आर्थिक और वित्तीय संवाद’ (Joint Economic and Financial Dialogue) की शुरुआत करेंगे। इसके अलावा, ‘आसियान-भारत माल व्यापार समझौते’ (AITIGA) की समीक्षा को समय पर पूरा करने का आह्वान किया गया है, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं (टैरिफ और गैर-टैरिफ) को हटाकर एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक वातावरण तैयार किया जा सके।
भारत और इंडोनेशिया के बीच का यह नया रणनीतिक तालमेल वास्तव में दोनों देशों के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के ऐतिहासिक संरेखण को दर्शाता है। भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण और इंडोनेशिया के ‘इंडोनेशिया एमास 2045’ (Indonesia Emas 2045) के एजेंडे के बीच गहरी पूरकता है, जो दोनों देशों को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक एकीकरण का मुख्य केंद्र बनाती है।
ऐतिहासिक रूप से, दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराधों का सामना करने के लिए समय-समय पर मंच साझा किए हैं। आगामी ‘तीसरी भारत-इंडोनेशिया सुरक्षा वार्ता’ इसी सिलसिले को आगे बढ़ाएगी, जो न केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों को दिशा देगी, बल्कि साइबर सुरक्षा, रक्षा उद्योग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और ट्रांसनेशनल संगठित अपराधों से निपटने के लिए भी एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगी। इसी कूटनीतिक प्रगति को निरंतरता देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को भारत आने का आधिकारिक निमंत्रण भी दिया है।
