प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में कल ‘सेवा तीर्थ’ में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों पर एल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभावों का आकलन करना और उससे निपटने की तैयारियों को मजबूत करना था। इस महत्वपूर्ण बैठक में 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जहां मानसून की स्थिति और देश के संवेदनशील जिलों में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान देश में हल्के से मध्यम स्तर का एल नीनो प्रभाव दिखने की संभावना है। इस मौसमी बदलाव से निपटने और इसके आर्थिक-कृषि प्रभावों को कम करने के लिए सरकार ने एक व्यापक और बहु-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है:
- 262 जिलों के लिए विशेष कृषि योजना: कृषि मंत्रालय ने एल नीनो से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए ‘जिला कृषि आकस्मिक योजना’ (District Agriculture Contingency Plans) को पूरी तरह से अपडेट कर दिया है। तात्कालिक निर्णय लेने के लिए राज्यों के साथ मिलकर ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
- वित्तीय सुरक्षा कवच: संवेदनशील राज्यों में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) और ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) के दायरे को बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किए गए हैं।
- जल और चारा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग: प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कमजोर जिलों में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए जलाशयों के पानी का अनुकूलतम और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही पशुपालन और डेयरी विभाग को माइक्रो और मैक्रो दोनों स्तरों पर सूखे व हरे चारे की उपलब्धता की मैपिंग करने को कहा गया है।
जलवायु-अनुकूल बीज और ग्रामीण रोजगार सुरक्षा
इस उच्च स्तरीय समीक्षा में केवल आपातकालीन तैयारियों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया गया है। कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) ने देश के संकटग्रस्त क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल (Climate Resilient) बीजों की किस्मों के वितरण और प्रसार को तेज कर दिया है, ताकि कम बारिश में भी फसलें सुरक्षित रह सकें।
इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित आर्थिक मंदी या कृषि संकट से निपटने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसी महीने की 1 तारीख से ‘विकसित भारत- रोजगार की गारंटी’ और आजीविका मिशन के तहत नए कार्यों की शुरुआत की है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बढ़ते तापमान, उच्च आर्द्रता और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रकोप को रोकने के लिए फील्ड स्तर तक चिकित्सा दिशानिर्देश और अलर्ट प्रभावी ढंग से प्रसारित किए जा रहे हैं।
