भारत और रूस की मजबूत होती दोस्ती और कूटनीतिक रणनीतियों ने दुनिया की बड़ी शक्तियों को हैरान कर दिया है। अमेरिका और चीन जैसे देशों की तमाम पाबंदियों और दबाव के बावजूद, भारत और रूस ने ऐसे रणनीतिक कदम उठाए हैं जिसने वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) का समीकरण बदल दिया है।
अमेरिकी पाबंदियों पर करारा जवाब
रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों और ब्लैक सी में घेराबंदी की कोशिशों के बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत तक एक सीधे रेलवे कॉरिडोर (Direct Rail Route) की घोषणा की है। रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन के अनुसार, “भारत तक पहुँचने का कोई भी मार्ग स्वीकार्य है।”
इस बयान को अमेरिका द्वारा नियंत्रित समुद्री मार्गों और तुर्की के बोस्फोरस स्ट्रेट के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि रूस अब अमेरिका या पश्चिमी देशों के दबाव की परवाह किए बिना सीधे भारतीय महासागर क्षेत्र से जुड़ेगा।
इस्लामी देशों से होकर गुजरने वाला रूट और कूटनीति
यह नया प्रस्तावित रेल मार्ग तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों से होकर भारत तक पहुँचेगा।
- ऊर्जा आपूर्ति: इस रूट के जरिए रूस से सस्ता कच्चा तेल, गैस और कोयला सीधे भारत के उद्योगों तक पहुँच सकेगा।
- समुद्री निर्भरता खत्म: अमेरिकी युद्धपोतों और समुद्री नाकेबंदी के खतरे को दरकिनार करते हुए यह जमीनी मार्ग दोनों देशों के व्यापार को नई सुरक्षा प्रदान करेगा।
डॉलर का दबदबा और $100 बिलियन का व्यापार लक्ष्य
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 55% कच्चा तेल रूस से खरीद रहा है। वर्ष 2030 तक दोनों देशों ने 100 अरब डॉलर ($100 Billion) के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है। इस रेल नेटवर्क के शुरू होने से:
- समुद्री लुटेरों (Pirates) और नाकेबंदी का डर समाप्त होगा।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को बड़ी चुनौती मिलेगी।
- अमेरिका की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को नियंत्रित करने की शक्ति प्रभावित होगी।
