प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद भारत और स्लोवाकिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “व्यापक साझेदारी” (Comprehensive Partnership) के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, श्रम प्रवासन, उच्च शिक्षा और क्वांटम संचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की यह पहली यात्रा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संबंधों को व्यापक साझेदारी का दर्जा दिया जाना दोनों देशों के साझा मूल्यों, प्राथमिकताओं और भविष्य की सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आपसी सहयोग को नई दिशा देने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच रक्षा सहयोग दोनों देशों के गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक सामंजस्य को दर्शाता है। वार्ता के बाद रक्षा सहयोग को लेकर एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ को अंतिम रूप दिया गया, जिससे दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।
दोनों नेताओं ने श्रम प्रवासन के क्षेत्र में हुए समझौते का स्वागत करते हुए कुशल पेशेवरों की सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनी आवाजाही को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। साथ ही सामाजिक सुरक्षा समझौते (Social Security Agreement) को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में भी काम करने का निर्णय लिया गया, जिससे दोनों देशों में कार्यरत पेशेवरों के हितों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और लचीलेपन को मजबूत करने के लिए परमाणु ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों के विकास पर मिलकर काम करने का फैसला किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को जल्द अंतिम रूप देने में स्लोवाकिया के सहयोग की सराहना की। वहीं प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने इस समझौते को दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों में से एक बताया।
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बढ़ते भू-राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने क्षेत्रीय संपर्क, खुले अंतरराष्ट्रीय व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने के लिए भारत और स्लोवाकिया के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिससे व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
