सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में आई कमी और निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली के कारण शुक्रवार को घरेलू बाजार में कीमती धातुओं के दाम दबाव में नजर आए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना 0.56 प्रतिशत लुढ़ककर 1,52,561 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक चला गया। वहीं, चांदी के वायदा भाव में भी कमजोरी देखी गई और यह 0.7 प्रतिशत गिरकर 2,42,067 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। बाजार की शुरुआत के बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा, जहां सोने का उच्चतम स्तर 1,52,990 रुपये रहा, लेकिन निवेशकों के सतर्क रुख के चलते यह टिक नहीं सका और दोपहर तक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा।
बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में सोना 1,52,500 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना हुआ है और निचले स्तरों पर धीरे-धीरे खरीदारी भी लौट रही है। हालांकि, बाजार में फिलहाल किसी मजबूत ‘मोमेंटम’ का अभाव है जो कीमतों को एक निश्चित दिशा दे सके। जानकारों का कहना है कि यदि सोना 1,53,000 रुपये के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो इसकी कीमतें 1,55,000 रुपये तक जा सकती हैं। इसके विपरीत, यदि यह 1,52,000 रुपये के स्तर को नीचे की ओर तोड़ता है, तो भाव 1,48,000 रुपये तक गिर सकते हैं। चांदी को लेकर रुझान अभी भी थोड़ा सकारात्मक बना हुआ है क्योंकि इसे औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश के पुराने आकर्षण का सहारा मिल रहा है, जिससे यह 2,42,000 रुपये के ऊपर मजबूती दिखाने का प्रयास कर रही है।
कीमती धातुओं पर इस दबाव का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में नरमी के संकेत मिलना है, जिसकी वजह से निवेशक अब सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों को छोड़कर शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे लेकिन अधिक रिटर्न देने वाले एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। इसके बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच बनी अनिश्चितता की स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, जिसके कारण बाजार में बहुत बड़ी गिरावट की संभावना भी कम दिखाई देती है। आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलचलें ही सोने और चांदी की अगली दिशा तय करेंगी।
