प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान “नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण” विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय कार्य सत्र में भाग ले रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में जी7 देशों के नेताओं के साथ-साथ साझेदार देशों के प्रतिनिधि और विश्व बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए हैं।
कार्य सत्र की शुरुआत फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और अन्य आमंत्रित नेताओं के औपचारिक स्वागत के साथ हुई। इसके बाद सभी नेताओं का सामूहिक फोटो सत्र आयोजित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी आज दो दिवसीय यात्रा पर एवियन पहुंचे हैं। जी7 शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत सोमवार को हो चुकी थी और भारत की भागीदारी इस वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। सम्मेलन के दौरान भारत जलवायु परिवर्तन, वैश्विक शांति, सुरक्षा, सतत विकास और आर्थिक प्रगति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा।
इस बार का जी7 शिखर सम्मेलन भारत के लिए विशेष रणनीतिक महत्व रखता है। प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के देशों की चिंताओं और प्राथमिकताओं को विश्व मंच पर मजबूती से रखने वाले हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विकासशील देशों की आवाज को प्रमुखता से उठाया है और इसी दिशा में यह सम्मेलन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहने वाला है। वह कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer तथा संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। इसके अलावा वह फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित विशेष रात्रिभोज में भी शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच प्रस्तावित बैठक को लेकर है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश और रणनीतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेता विचार-विमर्श करेंगे।
भारत की लगातार जी7 शिखर सम्मेलनों में भागीदारी यह दर्शाती है कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इस सम्मेलन से भारत को अपने हितों और विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुख वैश्विक शक्तियों के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।
