प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से पाठ्यपुस्तकों की सीमाओं से बाहर निकलने और छात्रों के जीवन को सही आकार देते हुए उनके बचपन को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पुरस्कार विजेताओं के साथ संवाद के दौरान कही।
सोशल मीडिया पर इस संवाद की झलकियां साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर छात्र के भीतर का बच्चा जीवित रहे, और इसके लिए खुद शिक्षकों को भी अपने भीतर के बच्चे को बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों में वास्तविक बदलाव लाने के लिए शिक्षकों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रहने के बजाय उनके जीवन का हिस्सा बनना होगा।
पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें:
- स्क्रीन एडिक्शन और स्वास्थ्य: बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम (स्क्रीन की लत) पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे कम करने के लिए खेलकूद, मैदानी गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
- स्तन कैंसर जागरूकता: स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं अब स्वेच्छा से स्वास्थ्य जांच के लिए आगे आ रही हैं, जो समाज में बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
- नशे के खिलाफ जागरूकता: नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को अनजाने में इसका शिकार होने से बचाने के लिए निरंतर जागरूक करना जरूरी है।
- नई शिक्षा नीति (NEP) और व्यावहारिक ज्ञान: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बच्चों को कक्षाओं से बाहर ले जाने और उन्हें वास्तविक दुनिया के कौशलों व व्यावहारिक कार्यों से जोड़ने पर जोर दिया।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष तीन विभागों से कुल 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों व पॉलिटेक्निक के 21 संकाय सदस्य और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं। संवाद के दौरान पुरस्कार विजेताओं ने अपने शिक्षण अनुभव और कक्षाओं को अधिक प्रभावी बनाने वाले नवोन्मेषी प्रयोगों को साझा किया।
