संसद का मानसून सत्र कल से शुरू होकर अगले महीने की 13 तारीख तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
सत्र शुरू होने से एक दिन पहले सरकार ने आज संसद भवन एनेक्सी में सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इसमें संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और डॉ. एल. मुरुगन भी मौजूद रहे।
बैठक में अपना दल की अनुप्रिया पटेल, जनता दल (यू) के संजय झा, तेलुगु देशम पार्टी के लावू श्रीकृष्ण देवरायलू, कांग्रेस के जयराम रमेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी सहित 40 राजनीतिक दलों के 50 से अधिक नेताओं ने भाग लिया।
हालांकि बैठक शुरू होते ही विपक्षी दलों ने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) को आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए प्रतीकात्मक वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप था कि एनसीपीआई कोई मान्यता प्राप्त संसदीय दल नहीं है। विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए व्यवधान नहीं, बल्कि सार्थक बहस जरूरी है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, झारखंड मुक्ति मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित सभी विपक्षी दलों ने एनसीपीआई को बैठक में बुलाए जाने के विरोध में वॉकआउट किया।
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने इस वॉकआउट को एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने के खिलाफ प्रतीकात्मक बहिष्कार बताया।
वहीं, एनसीपीआई के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने विपक्ष के विरोध की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में अब एनसीपीआई दूसरा सबसे बड़ा दल है।
