प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए हैं। एयरपोर्ट पर किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष अदिलबेक कासिमालियेव ने उनका स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री के स्वागत में पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई।
प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री SCO सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और कई अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वह एक सितंबर को SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री आज बिश्केक में ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इस प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में अपनी किर्गिस्तान यात्रा के दौरान किया था।
पीएम मोदी आज SCO के कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इनमें आर्मेनिया, किर्गिस्तान और ईरान के राष्ट्रपतियों के साथ मुलाकात के अलावा रूस के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी आज छठे विश्व घुमंतू खेलों (World Nomad Games) के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। यह आयोजन मध्य एशिया की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है।
अपने रवाना होने से पहले शनिवार को जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत इस क्षेत्र के लिए ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ पर आधारित अपनी दृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्र के निर्माण की दिशा में काम करेगा जो ‘आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद’ से मुक्त हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंधों को गहरा करने और शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
इस वर्ष SCO शिखर सम्मेलन की थीम “25 Years of the SCO: Together Towards Sustainable Peace, Development and Prosperity” है। सम्मेलन में आतंकवाद से मुकाबला, क्षेत्रीय स्थिरता और सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ समन्वय जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। राष्ट्राध्यक्षों के सत्र के दौरान बिश्केक घोषणा-पत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
