केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण और बुनियादी ढांचे का विकास भारत सरकार के आर्थिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने यह बात न्यूयॉर्क में भारतीय महावाणिज्य दूतावास और बैंक ऑफ अमेरिका के सहयोग से आयोजित एक उच्चस्तरीय निवेशक राउंडटेबल को संबोधित करते हुए कही।
वित्त मंत्री ने घरेलू नीतिगत उपायों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे ये कदम आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया कि सरकार के मुख्य प्रयासों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- इंफ्रास्ट्रक्चर व एसेट निर्माण: बुनियादी ढांचे, विशेषकर विमानन क्षेत्र के विस्तार और पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के जरिए उद्योगों को निरंतर समर्थन देना।
- तकनीक व एमएसएमई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटरों के विकास को प्रोत्साहन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों (GCC) को समर्थन और एमएसएमई के लिए आसान ऋण उपलब्धता।
- बैंकिंग व नियामकीय सुधार: बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) को कम करना तथा दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) जैसे सुधारों के जरिए नियामकीय स्पष्टता बढ़ाना।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत स्थिति का जिक्र करते हुए सीतारमण ने हालिया जीडीपी आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश ने 7.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।”
उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि कोविड-19 के बाद से ही भारत राजकोषीय अनुशासन के मार्ग पर प्रतिबद्ध रहा है और केंद्र व राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी से घरेलू निवेश माहौल में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। ये सभी प्रयास ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप हैं।
कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को दर्शाते हैं और दोनों देशों को व्यापार व निवेश संबंधों को और मजबूत करना चाहिए।
