केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आयोजित भारत-जापान उद्योग गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने दोनों देशों के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तकनीकी व आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। इसके अलावा, उन्होंने जापानी अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री अकाजावा रयोसेई के साथ द्विपक्षीय बैठक कर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की समीक्षा को तेज करने पर सहमति जताई।
बैठक के प्रमुख बिंदु और रणनीतिक घोषणाएं
- आर्थिक सुरक्षा के स्तंभ: गोयल ने कहा कि सेमीकंडक्टर और एआई दोनों देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा साझेदारी के मुख्य आधार हैं, जिनकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने वार्षिक शिखर सम्मेलन में की थी।
- 2032 तक $150 अरब की सेमीकंडक्टर मांग: भारत में 2032 तक सेमीकंडक्टर की मांग 150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार की रणनीति में चिप डिजाइन, मशीनरी, फैब्रिकेशन, ओएसएटी (OSAT), अनुसंधान और कौशल विकास शामिल हैं।
- बड़ा वित्तीय निवेश: भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने के लिए ‘सेमीकॉन इंडिया 1.0’ के तहत 10 अरब डॉलर और ‘सेमीकॉन इंडिया 2.0’ के तहत 15 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई गई है।
- प्रतिभा और तकनीक का मिलन: भारतीय कुशल कार्यबल और जापानी उन्नत तकनीक व इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के तालमेल से विनिर्माण और नवाचार के नए अवसर पैदा होंगे।
- जापानी उद्योग का समर्थन: बैठक में टोक्यो इलेक्ट्रॉन, एनईसी कॉरपोरेशन, फुजीफिल्म, क्योसेरा और निप्पॉन एक्सप्रेस जैसी 21 प्रमुख जापानी कंपनियों ने हिस्सा लिया और ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘डेवलप इन इंडिया’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
द्विपक्षीय वार्ता और निवेश लक्ष्य
25 अगस्त को हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश लक्ष्य की समीक्षा की। भारत सरकार ने जापानी उद्योग जगत को आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं और सुझावों पर प्राथमिकता से काम किया जाएगा ताकि सीईपीए को भविष्य की जरूरतों और नए आर्थिक अवसरों के अनुकूल बनाया जा सके।
