प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 21वीं सदी के भारत के लिए आधुनिक खेल इकोसिस्टम तैयार करने को सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों तक देशभर में ऐसा वातावरण विकसित किया जा रहा है, जहां खिलाड़ियों को प्रतिभा के हर स्तर पर जरूरी सहयोग मिल सके।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आज खेलो इंडिया संवाद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में देश की खेल प्रतिभा और युवा शक्ति को एकजुट करने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि देश के हर जिले में वैश्विक खेल मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लाल किले की प्राचीर से 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों की खेल प्रतिभा पहचानने के लिए बड़े स्तर पर टैलेंट हंट की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि बच्चे की रुचि किस खेल में है, बल्कि यह भी पहचानना जरूरी है कि वह किस खेल के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है। सरकार ऐसे बच्चों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगी।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि भारत में खेल अब एक बेहतरीन करियर और पेशे के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल केवल चैंपियन बनना नहीं सिखाते, बल्कि बेहतर प्रतियोगी बनना भी सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया संवाद केवल खेलों पर चर्चा का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ऐसा मंच है जहां युवाओं का प्रत्येक विचार देश की खेल नीति और दृष्टि को नई दिशा दे सकता है।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेल राष्ट्रीय प्राथमिकता और युवाओं के सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत का खेल इकोसिस्टम अब केवल खेल बुनियादी ढांचे और पदकों तक सीमित नहीं है। फिट इंडिया मूवमेंट और संडे ऑन साइकिल जैसी पहल लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में फिटनेस अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम खेलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दे रहा है तथा खिलाड़ियों के लिए समान अवसर मजबूत कर रहा है, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने के लिए बराबर मंच मिल सके।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 के समारोहों के तहत मेरा युवा भारत (MY Bharat) द्वारा आयोजित किया गया। देशभर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रत्येक जिले के दो कॉलेजों के युवाओं ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम में खेल, युवा नेतृत्व, नागरिक जिम्मेदारी, स्वयंसेवा, फिटनेस और राष्ट्र निर्माण को एक साझा मंच पर जोड़ा गया।
खेलो इंडिया संवाद ने युवाओं को देश की खेल महत्वाकांक्षाओं से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। साथ ही, युवाओं के विचारों और सुझावों को भारत के युवा एवं खेल इकोसिस्टम से जुड़ी नीतिगत चर्चा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। यह पहल प्रधानमंत्री के एक फिट, अनुशासित और खेल-प्रधान भारत के निर्माण तथा राष्ट्रीय विकास के केंद्र में युवाओं की आकांक्षाओं को रखने के विजन के अनुरूप है।
