नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लिकटेंस्टीन के कार्यवाहक राष्ट्रप्रमुख क्राउन प्रिंस अलोइस के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार (इनोवेशन) और जन-सामान्य के बीच संबंधों (पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज) समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए।
इससे पहले आज सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण (फॉरकोर्ट) में क्राउन प्रिंस अलोइस का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी अगवानी की। मीडिया को दिए अपने बयान में प्रिंस अलोइस ने कहा कि यह दौरा भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर लिकटेंस्टीन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि एक साल पहले लागू हुआ भारत-ईएफटीए (EFTA) व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA) दोनों देशों के रिश्तों में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। लिकटेंस्टीन इस गति को बनाए रखने और भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। इसके साथ ही, प्रिंस अलोइस ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार भी व्यक्त किया।
अपनी यात्रा के दौरान क्राउन प्रिंस अलोइस और उनकी पत्नी प्रिंसेज सोफी ने नई दिल्ली स्थित राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धांजलि दी। क्राउन प्रिंस आज शाम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद उनके सम्मान में आधिकारिक रात्रिभोज (बैंक्वेट) का आयोजन किया जाएगा।
लिकटेंस्टीन के कार्यवाहक राष्ट्रप्रमुख कल वडोदरा से नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री जयंत सिंह ने उनका स्वागत किया। इस यात्रा में उनके साथ प्रिंसेज सोफी, उच्च स्तरीय अधिकारियों का दल और प्रमुख उद्योगपतियों का एक बिजनेस प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
साल 2026 में प्रिंस अलोइस की यह दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले वे इसी साल फरवरी में ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में हिस्सा लेने नई दिल्ली आए थे। इससे पूर्व उन्होंने 2010 और 2018 में भी भारत का दौरा किया था।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल लागू हुए भारत-ईएफटीए समझौते के बाद यह दौरा भारत और लिकटेंस्टीन के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई गति प्रदान करेगा। साथ ही, दोनों देशों को नए क्षेत्रों में आपसी साझेदारी को मजबूत करने का अवसर भी मिलेगा।
