प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चार दिवसीय ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपोज 2026’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारियों (जैसे कोविड-19) से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक, तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी विकास दर को मजबूती से बनाए रखा है। यह 140 करोड़ देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने कई आर्थिक संकट देखे हैं और पश्चिम एशिया का तनाव अब भी जारी है। इन परिस्थितियों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा सीधे तौर पर उसकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है और ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ (क्लीन) ऊर्जा में ही निहित है।
गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में बड़ी उपलब्धि
प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि आज भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuel) स्रोतों पर आधारित है। भारत 500 गीगावाट (GW) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन के भंडार सीमित हैं, जबकि अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की संभावनाएं असीमित हैं।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में भारत की छलांग
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत सौर और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। बीते 12 वर्षों में 44 हजार से अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है, जिससे सालाना लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उन्होंने देश के हर सरकारी भवन, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और स्ट्रीट-लाइटिंग सिस्टम को सोलर एनर्जी से जोड़ने पर जोर दिया।
इसके अलावा, ‘पीएम-कुसुम योजना’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश भर में 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे किसान सालाना औसतन 1 लाख रुपये की बचत कर पा रहे हैं।
अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश
समारोह में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 67 बिलियन डॉलर का निवेश आया है। सितंबर 2024 में देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता जो 200 गीगावाट थी, वह अब बढ़कर 310 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी 6.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
130 से अधिक देशों की भागीदारी
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन का विषय “Invest. Innovate. Inspire.” (निवेश, नवाचार, प्रेरणा) रखा गया है। सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 40 से अधिक मंत्री भाग ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूके इसमें कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल हैं, जबकि भारत के 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं।
