प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी छह दिवसीय यूएई और यूरोपीय देशों की यात्रा के पहले चरण में अबू धाबी पहुंच गए हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति हवाई अड्डे पर यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान ने स्वयं उनकी अगवानी की और उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। विशेष सम्मान के तौर पर जब प्रधानमंत्री का विमान अमीराती हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, तो यूएई के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में ऊर्जा सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार को प्राथमिकता दी गई, जो पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अपनी शुरुआती टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हाल ही में हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और इन्हें पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। उन्होंने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद को अपना भाई कहकर संबोधित किया और चुनौतीपूर्ण समय में यूएई के नेतृत्व द्वारा दिखाए गए धैर्य की सराहना की। भारत के पूर्ण समर्थन को दोहराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक संघर्षों के इस दौर में संवाद और कूटनीति ही प्रगति का एकमात्र मार्ग है। आकाशवाणी संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार यह वार्ता पहले ही कई ठोस परिणामों तक पहुंच चुकी है जिसमें दोनों पक्षों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जो दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को एक संस्थागत स्वरूप प्रदान करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को लेकर एक समझौता ज्ञापन संपन्न हुआ और इसके साथ ही तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति पर भी एक अलग समझौता किया गया जो पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव के बीच भारत की चिंताओं को दूर करेगा। आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने भारत के पश्चिमी तट पर वाडिनार में एक जहाज मरम्मत क्लस्टर स्थापित करने के लिए भी सहमति जताई है। इसके अलावा निवेश के क्षेत्र में यूएई ने भारतीय बुनियादी ढांचे, आरबीएल बैंक और सम्मन कैपिटल में पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मजबूत हो रही है।
