भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वह नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में किसी भी बदलाव का फैसला करने से पहले महंगाई की दिशा और उसके रुझान को लेकर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार करेंगे। इसमें मौजूदा या उच्च स्तर पर महंगाई के आंकड़ों के बने रहने के साथ-साथ उसके स्थिर होने के संभावित स्तर को देखा जाएगा। बुधवार को जारी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनट्स में यह जानकारी सामने आई है।
गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, ऊंची महंगाई का मुख्य कारण आपूर्ति-पक्ष से जुड़े झटके हैं और कीमतों का दबाव फिलहाल व्यापक रूप लेता नहीं दिख रहा है। हालांकि, खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य इनपुट की ऊंची कीमतों के व्यापक महंगाई में बदलने का जोखिम बना हुआ है, इसलिए सतर्कता बरतनी होगी। यदि महंगाई बढ़ने के कोई संकेत मिलते हैं तो नीतिगत सख्ती (ब्याज दरों में बढ़ोतरी) की जरूरत पड़ सकती है।
बैठक के दौरान एमपीसी सदस्यों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर विचार व्यक्त किए:
- नागेश कुमार: पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों और अल नीनो के कृषि जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
- इंद्रनील भट्टाचार्य: पहली तिमाही में औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत रही हैं। पूंजीगत व्यय और कर्ज में बढ़ोतरी से निवेश को बढ़ावा मिला है, जबकि मजबूत निर्यात ने ऊंचे आयात के प्रभाव को संतुलित किया है।
- पूनम गुप्ता: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत में मानसून के सुधरने और आर्थिक संकेतकों की मजबूती से इस वर्ष आर्थिक विकास दर अनुमान से बेहतर और महंगाई थोड़ी कम रह सकती है।
- सौगत भट्टाचार्य व राम सिंह: वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता को देखते हुए भारत में महंगाई और विकास दर के संतुलन पर करीबी नजर बनाए रखना आवश्यक है।
