सासाराम और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप अपने चरम पर है। तापमान में लगातार हो रही वृद्धि और झुलसा देने वाली धूप का असर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि जरा सी लापरवाही बच्चों को सीधे अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा रही है। जिले में पड़ रही प्रचंड गर्मी के कारण तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छू रहा है, जिससे छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है और वे तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
इस बिगड़ते स्वास्थ्य हालातों का असर सासाराम के सदर अस्पताल सहित जिले के तमाम निजी क्लीनिकों में साफ देखा जा सकता है, जहां इन दिनों बुखार, डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी, उल्टी-दस्त और हीट स्ट्रोक के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चे इस मौसम की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। बच्चों की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य प्रशासन ने कमर कस ली है। सदर अस्पताल में हीट स्ट्रोक से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए विशेष रूप से एसीयुक्त यूनिट का संचालन किया जा रहा है, ताकि दवा के साथ-साथ उन्हें अनुकूल वातावरण मिल सके और वे जल्द स्वस्थ हो सकें। इसके अतिरिक्त, जिले के विभिन्न अस्पतालों में चित्र गैलरी के माध्यम से लोगों को गर्मी और लू से बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अभिभावक सतर्क रहें।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.के. सिंह ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जो छोटे बच्चों के कोमल शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। डॉ. सिंह ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को चिलचिलाती धूप में बिल्कुल बाहर न निकलने दें। उनके शरीर में पानी की कमी न होने पाए, इसके लिए समय-समय पर पानी, ओआरएस का घोल और अन्य तरल पदार्थ देते रहें। साथ ही, बच्चों को इस मौसम में हल्का और पौष्टिक भोजन देना ही उचित है, ताकि पाचन तंत्र पर अतिरिक्त भार न पड़े।
अस्पताल में भर्ती मरीजों के अभिभावकों ने भी समय पर मिले इलाज पर संतोष जताया है। कुश कुमार, जिनके बच्चे का अस्पताल में उपचार चल रहा है, उन्होंने बताया कि अचानक बच्चा काफी दस्त करने लगा था और कमजोरी के कारण सुस्त पड़ गया था, जिसे देख वे तुरंत अस्पताल भागे। यहां इलाज के बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और खेल-कूद रहा है। वहीं, एक अन्य अभिभावक भोला कुमार प्रजापति ने भी अपने बच्चे के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर उन्हें डायरिया का संदेह हुआ और वे तत्काल अस्पताल लेकर आए। समय रहते सही उपचार मिलने से बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आया है और अब वह खतरे से बाहर है। प्रशासन और डॉक्टर लगातार आमजन से सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं ताकि इस भीषण गर्मी के दौर में नौनिहालों को सुरक्षित रखा जा सके।
