भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गैर-सूचीबद्ध (अनलिस्टेड) कंपनियों के शेयरों की बिक्री को लेकर नियमों पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सेबी ने कहा है कि यदि किसी गैर-सूचीबद्ध कंपनी का मौजूदा शेयरधारक एक वित्तीय वर्ष में निजी सौदे (प्राइवेट डील) के माध्यम से अधिकतम 200 खरीदारों को अपने शेयर बेचता है, तो इसे सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक इश्यू) नहीं माना जाएगा।
यह स्पष्टीकरण सेबी ने आईडीबीआई बैंक को जारी एक पत्र में दिया है। आईडीबीआई बैंक ने यह जानना चाहा था कि यदि वह ऑफ-मार्केट लेनदेन के जरिए गैर-योग्य संस्थागत खरीदारों (नॉन-क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) को गैर-सूचीबद्ध इक्विटी शेयर बेचता है, तो क्या इसे प्रतिभूति कानूनों के तहत सार्वजनिक प्रस्ताव माना जाएगा।
सेबी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि इस प्रकार के लेनदेन मौजूदा शेयरधारक द्वारा किए जाने वाले द्वितीयक हस्तांतरण (सेकेंडरी ट्रांसफर) हैं। इन्हें कंपनी की ओर से प्रतिभूतियों की सदस्यता के लिए दिया गया प्रस्ताव या आमंत्रण नहीं माना जाएगा।
नियामक ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे शेयर हस्तांतरण के दौरान कंपनी के प्रवर्तकों (प्रमोटरों) को प्राप्त संविदात्मक अधिकार, जैसे प्रथम खरीद का अधिकार (राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल – आरओएफआर), का पालन किया जा सकता है।
सेबी के अनुसार, यदि शेयरों का हस्तांतरण बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के, निजी बातचीत के आधार पर चिन्हित निवेशकों, जिनमें गैर-योग्य संस्थागत खरीदार भी शामिल हो सकते हैं, को किया जाता है और वित्तीय वर्ष में खरीदारों की संख्या 200 की निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होती, तो ऐसे लेनदेन को सार्वजनिक निर्गम नहीं माना जाएगा।
