उत्तर प्रदेश सरकार ने शिकोहाबाद स्थित जे.एस. विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द करने का बड़ा निर्णय लिया है। यह फैसला मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में कुल 14 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 13 को मंजूरी दी गई। इन्हीं में जे.एस. विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त करने का अहम प्रस्ताव भी शामिल था।
सरकारी जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय ने नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की सैकड़ों फर्जी और बैकडेटेड मार्कशीट व डिग्रियां जारी की थीं। इन डिग्रियों का उपयोग राजस्थान में वर्ष 2022 की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती में नियुक्तियों के लिए किया गया। राजस्थान शिक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच के बाद इस पूरे मामले को संगठित अपराध की श्रेणी में रखा गया।
जांच के आधार पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सुकेश यादव को करीब दस माह पहले गिरफ्तार किया गया था, जबकि कुलसचिव को भी जेल भेजा गया। जांच में यह भी पाया गया कि विश्वविद्यालय ने न तो भूमि संबंधी मानकों का पालन किया और न ही उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई।
मान्यता रद्द होने के बाद विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को सौंपे जाएंगे। भविष्य में पूर्व छात्रों की मार्कशीट और डिग्री का सत्यापन वहीं सुरक्षित रखे गए रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा।
इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र असमंजस की स्थिति में हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें अपनी आगे की पढ़ाई, डिग्री की मान्यता और अंकतालिका किस विश्वविद्यालय से जारी होगी, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। फिलहाल विश्वविद्यालय का कामकाज संभालने के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।
