पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को शुरुआती झटका लगा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने दोहा में होने वाली वार्ता के अगले चरण को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच नई वार्ता Doha में हो सकती है। हालांकि, तेहरान ने इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी नई वार्ता की योजना नहीं है।
ईरान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पहले 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन को लागू करना है। इसके बाद ही किसी व्यापक या अंतिम समझौते पर चर्चा की जाएगी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उनका प्रतिनिधिमंडल दोहा केवल तकनीकी चर्चाओं के लिए जा रहा है और अमेरिकी अधिकारियों के साथ कोई प्रत्यक्ष वार्ता निर्धारित नहीं है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी स्पष्ट किया कि तेहरान अपने वादों का पालन तभी करेगा जब वॉशिंगटन भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाएगा। इसमें प्रतिबंधों में ढील देना और ईरान की संपत्तियों को जारी करना शामिल है।
अमेरिका और ईरान के परस्पर विरोधी बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हालिया प्रयासों के बावजूद कूटनीतिक प्रक्रिया अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है।
इस बीच क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं भी बनी हुई हैं।लेबनान में इज़राइल के साथ लंबे समय के युद्धविराम को लेकर अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पर बहस तेज हो गई है।
लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि यह लेबनान के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं करता। खासतौर पर उन प्रावधानों को लेकर चिंता जताई गई है, जिनमें इजरायली सैन्य वापसी को हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण से जोड़ा गया है।
दक्षिणी लेबनान में इजरायल की ओर से ताजा हवाई हमलों की भी खबरें हैं। वहीं हिज्बुल्लाह ने कहा है कि उसे देश की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
