सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई। कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुओं के भाव में आधा प्रतिशत तक की नरमी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कारोबार के दौरान सोना और चांदी दोनों ही सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव करते नजर आए।
एमसीएक्स पर सोने के 05 जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत 1,51,700 रुपये पर हुई, जो इसकी पिछली क्लोजिंग 1,51,721 रुपये के मुकाबले कमजोर रही। सुबह के 9:50 बजे तक सोना 207 रुपये यानी 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,51,514 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन के कारोबार के दौरान सोने ने 1,51,500 रुपये का निचला स्तर और 1,51,802 रुपये का उच्चतम स्तर दर्ज किया। वहीं, चांदी के 05 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट की बात करें तो यह पिछली क्लोजिंग 2,41,824 रुपये के मुकाबले 2,40,490 रुपये पर खुला। चांदी में अधिक दबाव देखा गया और यह 0.59 प्रतिशत यानी 1,424 रुपये की गिरावट के साथ 2,40,400 रुपये के आसपास बनी रही। चांदी के लिए दिन का न्यूनतम स्तर 2,40,218 रुपये और अधिकतम स्तर 2,41,250 रुपये रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख भी घरेलू बाजार के अनुरूप ही रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,680 डॉलर प्रति औंस पर और चांदी 0.73 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74.48 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती नजर आई। हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद यदि पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन धातुओं ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। बीते एक साल की अवधि में डॉलर के संदर्भ में सोना 40 प्रतिशत से अधिक और चांदी 126 प्रतिशत से अधिक का उछाल दिखा चुकी है, जो लंबी अवधि में इनके प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
कीमती धातुओं में जारी इस उतार-चढ़ाव के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ताओं में कोई ठोस निष्कर्ष न निकलने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हटने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की पेशकश की थी। अमेरिका का मानना है कि इन मुद्दों का समाधान टुकड़ों में नहीं बल्कि एक साथ निकाला जाना चाहिए, क्योंकि उसका तर्क है कि यदि मुद्दों को अलग-अलग हल किया गया तो उसका पक्ष कमजोर हो सकता है। इसी तरह की कूटनीतिक तनातनी का असर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और निवेश की धारणा पर भी पड़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव कमोडिटी बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
