पाकिस्तान का शेयर बाजार दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसका मुख्य कारण देश की आयातित ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता है। बढ़ती लागत और आयात में आने वाली बाधाओं के कारण पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर बाहरी स्थिति पर अब असहनीय दबाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल जारी रहता है, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दहाई अंकों की मुद्रास्फीति यानी भारी महंगाई की चपेट में बनी रहेगी। मुद्रास्फीति का यह दबाव देश के आर्थिक विस्तार को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जिसके चलते वित्तीय वर्ष 2027 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर के अनुमान को घटाकर मात्र 2.5 से 3.0 प्रतिशत कर दिया गया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पाकिस्तान का भविष्य पूर्ण आर्थिक पतन के कगार पर खड़ा नजर आ रहा है।
