तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है जिसमें कहा गया है कि यदि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष साल 2027 तक खिंचता है, तो इसके परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते हैं। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियां जिसमें लंबे समय से चलता संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर बने रहना और बढ़ता मुद्रास्फीति का दबाव शामिल है, पहले ही आईएमएफ के प्रतिकूल परिदृश्य (adverse scenario) को सक्रिय कर चुके हैं। इस संकट की स्थिति में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच सकती हैं, जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।
इस प्रतिकूल परिदृश्य के प्रभाव स्वरूप वैश्विक विकास दर पर भी भारी दबाव देखने को मिल सकता है। आईएमएफ के अनुमानों के मुताबिक, यदि तनाव इसी तरह बरकरार रहा तो साल 2026 में वैश्विक विकास दर धीमी होकर महज 2.5 प्रतिशत पर सिमट सकती है। साथ ही दुनिया भर में महंगाई की दर बढ़कर 5.4 प्रतिशत तक पहुँचने की आशंका है, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति और वैश्विक बाजार की स्थिरता प्रभावित होगी। जॉर्जीवा ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति न केवल आर्थिक प्रगति को बाधित करेगी बल्कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय अनिश्चितता को भी बढ़ावा देगी, जिसके लिए दुनिया को तैयार रहने की जरूरत है।
