प्रधानमंत्री की नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा बेहद सफल और ऐतिहासिक रही है, जिसने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इस यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कुल 17 महत्वपूर्ण समझौतों, रोडमैप और समझौता ज्ञापनों (MoU) को अंतिम रूप दिया गया। इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप [2026-2030]’ का तैयार होना है, जो आगामी पांच वर्षों के लिए दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग का एक ठोस दस्तावेज साबित होगा।
सांस्कृतिक मोर्चे पर भारत के लिए यह यात्रा बेहद भावुक और गौरवपूर्ण रही, जिसके तहत नीदरलैंड द्वारा चोल राजवंश के ऐतिहासिक ताम्रपत्रों की सफल वापसी सुनिश्चित की गई। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के सुरक्षित व सुचारु आवागमन को बढ़ावा देने के लिए ‘आवाजाही और प्रवासन पर समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए गए।
तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कई अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं:
- सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को मजबूत करने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी एएसएमएल (ASML) के बीच धोलेरा (गुजरात) में सेमीकंडक्टर फैब को सहयोग प्रदान करने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ। इसके साथ ही, भारत के खान मंत्रालय और नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के बीच भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) पर सहयोग के लिए भी सहमति बनी।
- जल और नवीकरणीय ऊर्जा: जल प्रबंधन के क्षेत्र में गुजरात की महत्वाकांक्षी ‘कल्पसर परियोजना’ के तकनीकी सहयोग के लिए भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं वॉटर मैनेजमेंट मंत्रालय के बीच आशय पत्र (LoI) साझा किया गया। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए हरित हाइड्रोजन सहयोग के विकास पर एक साझा रोडमैप तैयार किया गया, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) की स्थापना की गई और नीति आयोग व नीदरलैंड के बीच ऊर्जा रूपांतरण परियोजनाओं पर सहयोग हेतु संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर हुए।
- कृषि, पशुपालन और डेयरी विकास: कृषि क्षेत्र में दो नए मील के पत्थर स्थापित किए गए, जिसके तहत पश्चिम त्रिपुरा में फूलों के लिए ‘इंडो-डच उत्कृष्टता केंद्र’ और बेंगलुरु के पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र (CEAH) में डेयरी प्रशिक्षण पर ‘इंडो-डच उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों के बीच पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया।
- स्वास्थ्य और सीमा शुल्क: चिकित्सा अनुसंधान को गति देने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और नीदरलैंड के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड द एनवायरनमेंट (RIVM) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। व्यापार को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सीमा शुल्क मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर भी दोनों सरकारों के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ।
- उच्च शिक्षा और शैक्षणिक अनुसंधान: शिक्षा के स्तर पर सहयोग को बढ़ाते हुए दोनों देशों के बीच एक व्यापक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत भारत के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय और नीदरलैंड के ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरीज़ और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच ऐतिहासिक व पुरातात्विक दस्तावेजों के आदान-प्रदान के लिए भी समझौता ज्ञापन संपन्न हुआ।
