विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया है। इसके साथ ही Africa CDC ने भी इसे महाद्वीपीय सुरक्षा से जुड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति माना है। बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह जारी की है।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने 17 मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम-2005 के तहत इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया। इसके बाद अफ्रीका सीडीसी ने भी इस प्रकोप को महाद्वीपीय स्तर पर गंभीर खतरा माना।
डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन समिति ने 22 मई को जारी अपनी अस्थायी सिफारिशों में प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ाने, अज्ञात कारणों वाले बुखार के मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग को मजबूत करने तथा बुंडीबुग्यो वायरस से प्रभावित इलाकों की यात्रा को हतोत्साहित करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला एक गंभीर वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जिसकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है। चिंता की बात यह है कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से होने वाले संक्रमण की रोकथाम या उपचार के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इसे लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा की सीमाओं से जुड़े देशों, खासकर दक्षिण सूडान में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए भारतीय नागरिकों से अगले आदेश तक इन देशों की अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। सरकार ने वहां रह रहे भारतीयों और यात्रियों से स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और सतर्क रहने की अपील की है।
फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत में अब तक बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़े इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि केंद्र सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां वैश्विक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत कर रही हैं।
