आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) की इकाई, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान (NHRIMH), कोट्टायम द्वारा “नैदानिक अभ्यास और होम्योपैथी में कृत्रिम मेधा (AI) का अनुप्रयोग” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। “बुद्धि और जुनून का संगम” थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य देखभाल और होम्योपैथिक अनुसंधान में एआई के उभरते अनुप्रयोगों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
केन्द्रीय आयुष मंत्री का संबोधन
केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में एआई की बढ़ती प्रासंगिकता और विशेष रूप से होम्योपैथी के क्षेत्र में इसके नैतिक व जिम्मेदार अनुप्रयोग पर जोर दिया।
वहीं, सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने उद्घाटन सत्र में शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे एआई की क्षमताओं के साथ-साथ इसके नैतिक आयामों को भी गहराई से समझें। Sameinar में सर्वसम्मति से इस बात पर बल दिया गया कि स्वास्थ्य सेवा में एआई के उपयोग के साथ मानवीय देखरेख, वैज्ञानिक पुष्टि, डेटा की विश्वसनीयता और सख्त सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं।
10 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर
इस अवसर पर मनोरोग और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए 9 प्रमुख होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त, अंतर-विषयक अनुसंधान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘सेवाभारती, एट्टुमानूर’ के साथ भी एक अलग MoU साइन किया गया।
देशभर से जुटे विशेषज्ञ और छात्र
NHRIMH के प्रभारी अधिकारी डॉ. देबदत्त नायक के अनुसार, इस सेमिनार में भारत भर के लगभग 12 होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और छात्रों ने भाग लिया।
तकनीकी कार्यक्रम के तहत कुल चार सत्र आयोजित किए गए, जिनमें नैदानिक निर्णय सहायता में AI, होम्योपैथी में AI के व्यावहारिक अनुप्रयोगों और नैदानिक-मौलिक अनुसंधान में इसके नैतिक पहलुओं पर केंद्रित व्याख्यान दिए गए।
इस सेमिनार में सीसीआरएच के उप महानिदेशक डॉ. के. सी. मुरलीधरन, डॉ. जनार्दनन नायर और प्रो. (डॉ.) ईश्वर दास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। यह आयोजन होम्योपैथिक अनुसंधान में वैज्ञानिक नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
