बोधगया स्थित जयश्री बुद्ध विहार से भगवान बुद्ध और उनके प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र तथा महामोगलायन की पवित्र अस्थि-कलश के साथ एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन में विश्व के लगभग 20 देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभा यात्रा में मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना ए. एन. भी शामिल हुईं और उन्होंने भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि-कलश के साथ श्रद्धा व्यक्त की।
यह शोभा यात्रा भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया में स्थित महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित जयश्री बुद्ध विहार से शुरू हुई। पारंपरिक बाजे-गाजे और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच चार सुसज्जित रथों पर अस्थि-कलश रखकर शोभा यात्रा निकाली गई। यह यात्रा बोधगया के प्रमुख मार्गों से होती हुई 80 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा के पास से गुजरकर कालचक्र मैदान तक पहुंची।
शोभा यात्रा के दौरान बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु अत्यंत उत्साह और आस्था के साथ “बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि और संघं शरणं गच्छामि” का जाप करते हुए आगे बढ़ रहे थे। सभी श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में थे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य और संगीत के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे।
महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के महासचिव भंते शिवली थेरो ने बताया कि यह आयोजन तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का हिस्सा है, जो 1 फरवरी से 3 फरवरी तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाबोधि सोसायटी परिसर से हुई, जहां भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों सारिपुत्र और महामोगलायन की पवित्र अस्थि-कलश को महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।
पूजा के बाद इन पवित्र अस्थि-कलश को 1 से 3 फरवरी तक जयश्री बुद्ध विहार में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे। 3 फरवरी को निकाली गई शोभा यात्रा में भारत के अलावा श्रीलंका, कोरिया, थाईलैंड, जापान, वियतनाम और भूटान सहित कई देशों के श्रद्धालु शामिल हुए।
हर वर्ष महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा इस प्रकार का भव्य धार्मिक आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर महाबोधि सोसायटी परिसर और जयश्री बुद्ध विहार को फूल-मालाओं और आकर्षक सजावट से सजाया गया, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में डूबा नजर आया।
