संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना की है। उन्होंने यह प्रशंसा नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले की। गुटेरेस ने कहा कि एआई आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण विषय बन चुका है और यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने इस वैश्विक सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल सरकारों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र को एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाएगी।
यह वैश्विक समिट फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य एआई के जरिए मानव विकास, समावेशी विकास और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है। इस सम्मेलन में एआई के प्रभाव, नीतियों और वैश्विक सहयोग के नए मॉडल पर चर्चा होगी। यह आयोजन ‘पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस’ के सिद्धांतों पर आधारित है, जो एआई को मानवता के हित में उपयोग करने की दिशा तय करता है।
समिट के लिए दुनिया भर से जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 100 से ज्यादा देशों से 35 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। इसमें 500 से ज्यादा स्टार्टअप भी शामिल हैं, जो जिम्मेदार और समावेशी एआई के वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर प्रस्तावित स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के सदस्यों की सूची भी जारी की है। यह 40 विशेषज्ञों का वैश्विक समूह होगा, जिसका उद्देश्य एआई विकास का मूल्यांकन करना, वैश्विक संवाद को बढ़ावा देना और नीति निर्माण के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। इस पैनल में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बालारामन रविंद्रन और यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक विपिन कुमार भी शामिल हैं।
गुटेरेस ने कहा कि यह वैज्ञानिक पैनल दुनिया को फर्जी जानकारी और वास्तविक तथ्यों के बीच अंतर समझने में मदद करेगा। साथ ही यह एआई से जुड़ी विश्वसनीय और निष्पक्ष समझ विकसित करने के लिए एक प्रामाणिक संदर्भ बिंदु साबित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी प्रतिस्पर्धा और वैश्विक तनाव के दौर में एआई पर साझा समझ और सहयोग पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 वैश्विक एआई शासन और नीति निर्धारण के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है। यह सम्मेलन सुरक्षा और जोखिम से आगे बढ़कर एआई के वास्तविक प्रभाव और उसके व्यावहारिक उपयोग पर फोकस करेगा, खासकर ग्लोबल साउथ देशों में तकनीक के विस्तार और सहयोग को बढ़ावा देने के संदर्भ में।
इस समिट के जरिए भारत वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल तकनीकी सहयोग बढ़ाएगा बल्कि एआई के जिम्मेदार और मानवीय उपयोग के लिए वैश्विक ढांचा तैयार करने में भी मदद करेगा।
