भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नई दिल्ली में टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत और खाड़ी क्षेत्र के छह देशों — सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन — के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और जीसीसी देशों के बीच प्रस्तावित एफटीए एक बड़ा नया व्यापार गलियारा खोलेगा। उन्होंने बताया कि भारत जल्द ही अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते की पहली किश्त की घोषणा करेगा और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौता भारत का नौवां एफटीए होगा।
मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत और जीसीसी देश औपचारिक व्यापार समझौते के तहत अपने संबंधों को नई दिशा दें। उनके अनुसार यह समझौता भारत के ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा मजबूत करने और व्यापार विस्तार को गति देने में मदद करेगा।
भारत और जीसीसी देशों के बीच व्यापार पहले से ही काफी मजबूत है। दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार सैकड़ों अरब डॉलर स्तर पर पहुंच चुका है और खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। यह प्रवासी भारतीय भारत की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं और बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजते हैं।
सरकार का मानना है कि भारत-जीसीसी एफटीए से खाद्य प्रसंस्करण, इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोकेमिकल और आईसीटी जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे दोनों पक्षों के बीच आर्थिक साझेदारी और निवेश सहयोग को नई ऊंचाई मिलने की संभावना है।
यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। भारत इन देशों से कच्चा तेल और गैस आयात करता है, जबकि बदले में इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न-आभूषण, मशीनरी और केमिकल जैसे उत्पाद निर्यात करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जीसीसी के बीच एफटीए वार्ता का फिर से शुरू होना वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। यह समझौता निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर पैदा करेगा और भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी बढ़ाएगा।
