प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में देश के 16 अग्रणी एआई और डीपटेक स्टार्टअप्स के सीईओ और संस्थापकों के साथ विस्तृत बैठक की। इस गोलमेज सम्मेलन का उद्देश्य उभरती तकनीकों के जरिए भारत की बड़ी जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करना था।
बैठक में शामिल स्टार्टअप्स स्वास्थ्य सेवा, कृषि, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन उद्यमों ने अपने नवाचारों और भविष्य की योजनाओं को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया।
स्वास्थ्य क्षेत्र में स्टार्टअप्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग उन्नत निदान, जीन थेरेपी और बेहतर रोगी रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए कर रहे हैं, जिससे दूर-दराज के इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। वहीं कृषि क्षेत्र में जियोस्पेशियल तकनीक और अंडरवाटर इंटेलिजेंस के जरिए फसल उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु जोखिमों से निपटने के समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, कुछ स्टार्टअप्स साइबर सुरक्षा और एथिकल एआई पर काम कर रहे हैं, जबकि अन्य न्याय व्यवस्था और शिक्षा तक स्थानीय भाषाओं के माध्यम से पहुंच बढ़ाने के प्रयास में जुटे हैं। इन नवाचारों का उद्देश्य पुरानी प्रणालियों का आधुनिकीकरण कर उद्यम उत्पादकता और सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूती देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इन इनोवेटर्स की सराहना करते हुए कहा कि भारत की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करना समय की मांग है। उन्होंने कृषि और पर्यावरण संरक्षण में एआई की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य की सुरक्षा, फसल उत्पादकता की निगरानी और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए एआई आधारित उपकरणों के उपयोग की बात कही।
पीएम मोदी ने भारतीय भाषाओं और संस्कृति को सशक्त बनाने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने मातृभाषा में उच्च शिक्षा के लिए एआई टूल्स के विस्तार को आवश्यक बताते हुए कहा कि तकनीक को समावेशी और सुलभ बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
इस बैठक में प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी उपस्थित रहे।
